Wednesday, July 20, 2016

पहले प्यार वाला " पुल "

हिरणी सी कुलाचे भरती ,बड़ी बड़ी आँखों वाली उस लड़की का आना जैसे   बसन्त की बयार थी या यू कहे फिजाओं में रौनक जैसे आगयी थी।और वो ?वो पहली दफा में ही उस पर मर मिटा था ।उसकी मासूमियत,भोलापन और   अल्हण जवानी और बिना साँस लिए बोलने की अदा।उसकी पहली मुलाकात और बातचीत कुछ यू शुरू हुए।वो अपनी छोटी बहन को ढूढ़ने उसके (लड़के) के घर आयी थी। लड़के की बहन और उसकी बहन एक ही कक्षा और एक ही स्कूल में पढ़ती थी ।और लड़के ने बताया के उसका नया क्वार्टर लिया गया है वही गयी होगी ।सब लोग वही गए है चलो वही पंहुचा देता हूँ।"तुम क्या करती हो?""पढ़ती हूँ " कहाँ?" किस क्लास में हो" "स्कूल नहीं कॉलेज में हूँ बीए सेकंड बीए सेकंड इयर में "और उसने कॉलेज का नाम बता दिया।"और आप क्या करते है?"मैं बीए फाइनल ईयर में""अरे वाह" वह खनकती सी हँसी हंस दी।और एक ही पल में एक असाधारण घटना घट गयी।उस 20 मिनट के रस्ते में वो एक दूसरे के बारे में बहुत कुछ जान गए और जब वो विदा हुयी तो लड़के का दिल अपना न रहा उसे जादूगरनी ले उड़ी थी।उस दिन वो एक साधारण सा पुल दो दिलों को जोड़ने का माध्यम बन गया।हा वो पुल तो बस पहले उसके लिए एक  साधारण सी थी जो केवल कॉलोनी और गांव जो जोड़ती थी मगर अब वो जादू की पुल हो गयी क्योंकि जादूगरनी पुल के उस पार की थी।लोहे की पुल पुरानी थी।

  1. उसकी मासूमियत,भोलापन और   अल्हण जवानी और बिना साँस लिए बोलने की अदा
  2. उस दिन वो एक साधारण सा पुल दो दिलों को जोड़ने का माध्यम बन गया।
  3. जादू की पुल हो गयी क्योंकि जादूगरनी पुल के उस पार की थी|
  4. इनलोगों का प्यार भी आँधी तूफान से गुजर रहा था|
  5. प्यार कभी टूटते टूटते बचता या कभी टिस भी होती उसी होल के जैसा।
  6. लड़की चहक उठी।उधर पूल की भी मरम्मत शुरू हो गयी ।आखिर क्या ठिकाना कब ढह जाये वक्त रहते मरम्मत हो जायेगी तो जिंदगी भी बच जायेगी।
मगर मजबूत ।धीरे धीरे उसका जादू बढ़ता गया।अक्सर उनको मिलाने में दोनों के छोटी बहनों को खूब रोल होता।माध्यम इतना अच्छा के दोनों एक दूसरे को देख चैन भी पा ले लेते और कही कोई शक की गुंजाइश भी न रहती। मगर कहते है के इश्क और मुश्क छुपाये नहीं छुपते।कॉलोनी का लड़का और पुल पार गांव की लड़की की ,इश्क की बात दबी दबी जबां से कहने लगे।इधर कभी कभी लड़की एकांत के क्षणों में डबडबायी आँखों से पूछती "तुम साथ तो नहीं छोड़ोगे?"और वो उसे कस कर अपनी बाहों में समेट लेता"पागल हो?हाथ पकड़ा है साथ चलने के लिए "और वो आश्वाशन पाकर उसके बाहों में दुबक जाती।दिन बीतते रहे और महीने साथ में बीत गए साल भी।दोनों छुप छुप कर मिलते मिलते थोडा खुल कर मिलने लगे। लड़की के घर वाले जान गए थे उन्हें एतराज नहीं था पीछे -2 सयानी बेटियां और पड़ी थी।लड़का बुरा न था अपने कुल का था ।सुन्दर था ।भविष्य था।वो आश्वस्त थे।मगर लड़के को घर पर बताना था बाकि था बस अड़ंगा ये था दो बड़ी बहने थी जिनकी अभी शादी करनी थी ।फिर पहले कैसे वो सोचे?खैर दोनों में झगड़े भी खूब होते।प्यार था तो तकरार भी।
इधर पुल भी बहुत पुराना होने के कारण कई जगह से टूट रहा था।जगह जगह होल नजर आने लगे थे पैर फसने का भी डर बना रहता मगर फिर भी पुल मजबूती से टिका रहा कितने गाड़िया या लोग उसके सीने को रौंदते चलते मगर जर्जर होने के बावजूद उसमे अभी गजब की ताकत थी।इधर इनलोगों का प्यार भी आँधी तूफान से गुजर रहा था।लोगों की कानाफूसी अब बन्द होकर सीधे सीधे व्यंग्य पर आगयी थी।और इनमें भी कभी   किसी की बात को लेकर या खुद की बातों को लेकर तकरार हो जाता।पुल सी जर्जर अवस्था में इनका भी प्यार कभी टूटते टूटते बचता या कभी टिस भी होती उसी होल के जैसा।मगर साथ न छूटा।बीतते बीतते 5साल गुजर गए ।इस प्यार को रिश्ते को कोई नाम हासिल नहीं हुआ।अब लड़की उकता गयी।घर के ताने के पीठ पिछे 3लड़किया और बैठी है कब ब्याहेगा ये लड़का?समाज के ताने अलग और ये लड़का कुछ करता क्यों नहीं?कब लेजायेगा मुझे?आखिर एक दिन बारिश की तरह बरस पड़ी।खूब रोई और कहा"अब तुम साफ साफ बताओ क्या करोगे?फिर झगड़ा शुरू हो गया।लड़का गुस्से में बोला "जाओ कर लो कही।"वो तड़प गयी ।क्या इतने साल की तपस्या इसी दिन के लिए थी?उसके मन में तो वो बस चूका है ।कैसे निकाले दिल से?"इधर पुल भी अब डगमगा रहा था।अब वो भी इतना जर्जर हो चूका था के शायद ही अब वो टिका रह पाता।लोग सम्भल के आते जाते।मगर भय बना रहता।इधर कुछ दिन दिन तनाव में गुजारे फिर लड़की रोते रोते शांत हो गयी।फिर उसी प्यार के खिलखिलाहट के साथ उसे कॉल की।लड़का फिर दीवानो के जैसा उससे बात करने लगा।उसकी इसी अदा का तो वो कायल था।न उसके दिल में नाराजगी ज्यादा दिन ठहरती न ही मुँह फूलना न दुखी रह पाती।हमेशा फूल सी खिली रहती।आखिर लड़के ने सच माना।हा अब बहुत हुआ चलो अब रिश्ते को नाम दे।लड़की चहक उठी।उधर पूल की भी मरम्मत शुरू हो गयी ।आखिर क्या ठिकाना कब ढह जाये वक्त रहते मरम्मत हो जायेगी तो जिंदगी भी बच जायेगी।सबको लगा ये इश्क में क्या नयी बात हुयी।न कोई दुश्मन था न कोई एतराज।वो तो लड़का ही देर.....मगर एक सच्चाई को किसी ने महसूस नहीं  किया।जहाँ आज के रिश्ते परिपक्व होकर भी शक की आंधी में तिनके की तरह बिखर रहे थे।प्यार के बरसात बिना सुख रहे थे ,वही एक नादानी से शुरू हुआ प्यार 6वर्ष तक मजबूती से टिका रहा।इन वर्षो में न जाने कितने लड़के के लिए रिश्ते आये ,अनबन ,तकरार और बचपना भी आया मगर न टुटा न छूटा तो वो था उनका सच्चा प्यार ।लोगों ने इसे साधारण लिया मगर आज के जमाने में एक के लिए इतनी ईमानदारी,सच्चाई ,सच्चा प्यार किसी को नजर न आया।आता भी नजर कैसे?आज तो झूठ और फरेब ऐसे छा गए है के लोगो को यही नजर आते है।इधर लड़के के घर शहनाई बज रही थी।उधर दो दिलों को जोड़ने वाली पूल भी चमचमाती नई बनी हुयी इतरा रही थी।क्योंकि जर्जर होने के बावजूद भी वो खुद को गिरने नहीं दी और आज मजबूती के साथ खड़ी थी । बिल्कुल उस सच्चे प्यार की तरह ...

बंदना चौवे
बलिया

2 comments:

  1. Nice Article written. it is realy heart touching.

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  2. Nice Article written. it is realy heart touching.

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