Sunday, November 13, 2016

बिना बाल शिक्षा के देश के उज्जवल भविष्य की कल्पना करना निरर्थक (बाल दिवस 14 नवंबर 2016 पर विशेष)

भारत में प्रथम प्रधानमंत्री स्वर्गीय जवाहर लाल नेहरू की जन्म जयंती को बाल दिवस के रूप में 14 नवंबर को  मनाया जाता है। क्योंकि स्वर्गीय जवाहर लाल नेहरू जी को बच्चों से बहुत प्यार था और बच्चेउन्हें चाचा नेहरू पुकारते थे। स्वर्गीय जवाहर लाल नेहरू जी का जन्मदिवस बाल दिवस के रूप में बच्चों को समर्पित भारत का एक राष्ट्रीय त्योहार है। दरअसल बाल दिवस बच्चों के लिए महत्वपूर्ण दिन होताहै। बच्चों को स्कूल में हर साल बाल दिवस का आने का इंतजार रहता है। क्योंकि इस दिन स्कूलों में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन होता है। जिसमें बच्चे  बढ़चढ़कर भागीदारी करते हैं। और अपनी प्रतिभादिखाते हैं। इस दिन स्कूली बच्चों के चेहरे पर खुशी देखने लायक होती है। इस दिन बच्चे स्कूलों में सज-धज कर जाते हैं। और  अपने चाचा जवाहर लाल नेहरू को प्यार से याद करते हैं। लेकिन दुनियाभर मेंबहुत सारे ऐसे भी बच्चे हैं। जिन्हें बाल दिवस का मतलब ही नहीं पता। उनके लिए हर दिन मुश्किलों से भरा होता है। क्योंकि उनकी या उनके परिवार की ऐसी स्थिति नहीं होती है। जिससे कि वे स्कूल जासकें या बाल दिवस पर होनें वाले कार्यक्रमों का हिस्सा बन सकें।
बच्चे देश का का आने वाला भविष्य हैं। इसलिए हमें बच्चों की शिक्षा में अमीर-गरीब या लैंगिक आधार पर भेदभाव नहीं करना चाहिए। बच्चों को बाल श्रमिक बनने से रोकना चाहिए। जो उम्र बच्चों के खेलनेऔर पढ़ने की होती है उसमें आज भी पूरे विश्व में  बच्चे मजदूरी करते हैं। भारत देश के बारे में कहा जाए तो यहाँ बाल मजदूरी बहुत बड़ी समस्या है। भारत में बाल मजदूरी की समस्या सदियों से चली रही है। कहने को भारत देश में बच्चों को भगवान का रूप माना जाता है। फिर भी बच्चों से बाल मजदूरी कराई जाती है। जो दिन बच्चों के पढ़नेखेलने और कूदने के होते हैंउन्हें बाल मजदूर बनना पड़ताहै। इससे बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। कहने को सरकारें बाल मजदूरी को खत्म करने के लिए बडे-बडे वादे और घोषणाएं करती हैंफिर भी होता सिर्फ ढाक के वही तीन पात है। इतनीजागरूकता के बाद भी भारत देश में बाल मजदूरी का खात्मा दूर-दूर तक नहीं दिखता है। इसके उल्ट बाल मजदूरी दिन  दिन बढती जा रही है मौजूदा समय में गरीब बच्चे सबसे अधिक शोषण का शिकारहो रहे हैं। जो गरीब बच्चियां होती हैं उनको पढने भेजने की जगह घर में ही बाल श्रम कराया जाता है। छोटे-छोटे गरीब बच्चे स्कूल छोड़कर बाल-श्रम हेतु मजबूर हैं। बाल मजदूरी बच्चों के मानसिकशारीरिकआत्मिकबौद्धिक एवं सामाजिक हितों को प्रभावित करती है। जो बच्चे बाल मजदूरी करते हैंवो मानसिक रूप से अस्वस्थ्य रहते हैं और बाल मजदूरी उनके शारीरिक और बौद्धिक विकास मेंबाधक होती है। बालश्रम की समस्या बच्चों को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित करती है। जो की सविधान के विरुध्द है और मानवाधिकार का सबसे बड़ा उल्लंघन है।
बाल-श्रम की समस्या भारत में ही नहीं दुनिया कई देशों में एक विकट समस्या के रूप में विराजमान है। जिसका समाधान खोजना जरूरी है। भारत में 1986 में बालश्रम निषेध और नियमन अधिनियम पारितहुआ। इस अधिनियम के अनुसार बालश्रम तकनीकी सलाहकार समिति नियुक्त की गई। इस समिति की सिफारिश के अनुसारखतरनाक उद्योगों में बच्चों की नियुक्ति निषिद्ध है। भारतीय संविधान केमौलिक अधिकारों में शोषण और अन्याय के विरुध्द अनुच्छेद 23 और 24 को रखा गया है। अनुच्छेद 23 के अनुसार खतरनाक उद्योगों में बच्चों के रोजगार पर प्रतिबंध लगाता है। और संविधान के अनुच्छेद24 के अनुसार 14 साल के कम उम्र का कोई भी बच्चा किसी फैक्टरी या खदान में काम करने के लिए नियुक्त नहीं किया जायेगा और  ही किसी अन्य खतरनाक नियोजन में नियुक्त किया जायेगा। औरफैक्टरी कानून 1948 के तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के नियोजन को निषिद्ध करता है। 15 से 18 वर्ष तक के किशोर किसी फैक्टरी में तभी नियुक्त किये जा सकते हैंजब उनके पास किसी अधिकृतचिकित्सक का फिटनेस प्रमाण पत्र हो। इस कानून में 14 से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए हर दिन साढ़े चार घंटे की कार्यावधि तय की गयी है और रात में उनके काम करने पर प्रतिबंध लगाया गया है। फिरभी इतने कडै कानून होने के बाद भी बच्चों से  होटलोंकारखानोंदुकानों इत्यादि में दिन-रात कार्य कराया जाता हैं। और विभिन्न कानूनों का उल्लंघन किया जाता है। जिससे मासूम बच्चों का बचपन पूर्ण रूपसे प्रभावित होता है।
आज विश्व में जितने बाल श्रमिक हैंउनमें सबसे ज्यादा भारत देश में हैं। एक अनुमान के अनुसार विश्व के बाल श्रमिकों का एक तिहाई से ज्यादा हिस्सा भारत में है। और एक अनुमान के अनुसार भारत के50 प्रतिशत बच्छे अपने बचपन के अधिकारों से वंचित हैं।  उनके पास शिक्षा की ज्योति पहुँच पा रही है और  ही उचित पोषण। हालांकि फैक्ट्री अधिनियमबाल अधिनियमबाल श्रम निरोधक अधिनियमआदि भी बच्चों के अधिकार को सुरक्षा देते हैं। किन्तु इसके विपरीत आज की स्थिति बिलकुल अलग है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में 2 करोड़ बाल मजदूर हैं। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार तोभारतीय सरकारी आंकडों से लगभग ढाई गुना ज्यादा 5 करोड़ बच्चे बाल मजदूर हैं। असल में कहा जाए तो बच्चे अपनी उम्र के अनुरूप कठिन काम गरीबी के कारण करते हैं। गरीबी ही बच्चे को बालश्रमिक बनने को मजबूर करती है। इसके अलावा भी बढती जनसँख्यासस्ती मजदूरीशिक्षा का अभाव और मौजूदा कानूनों का सही तरीके से क्रियान्वित  हो पाना जैसे कारण बाल श्रम के लिए जिम्मेदारहैं।          
वर्तमान में भारत देश में कई जगहों पर आर्थिक तंगी के कारण माँ-बाप ही थोड़े पैसों के लिए अपने बच्चों को ऐसे ठेकेदारों के हाथ बेच देते हैंजो अपनी सुविधानुसार उनको होटलोंकोठियों तथा अन्यकारखानों आदि में काम पर लगा देते हैं। और उन्हीं होटलोंकोठियों और कारखानों के मालिक बच्चों को थोड़ा बहुत खाना देकर मनमाना काम कराते हैं। और घंटों बच्चों की क्षमता के विपरीत या उससे भीअधिक काम करानाभर पेट भोजन  देना और मन के अनुसार कार्य  होने पर पिटाई यही बाल मजदूरों का जीवन बन जाता है। इसके अलावा भी काम देने वाला नियोक्ता बच्चों को पटाखे बनानाकालीन बुननावेल्डिंग करनाताले बनानापीतल उद्योग में काम करनाकांच उद्योगहीरा उद्योगमाचिसबीड़ी बनानाकोयले की खानों मेंपत्थर खदानों मेंसीमेंट उद्योगदवा उद्योग आदि सभीखतरनाक काम अपनी मर्जी के अनुसार कराते हैं। कई बार श्रम करते-करते बच्चों को यौन शोषण का शिकार भी होना पड़ता है। और खतरनाक उद्योगों में काम करने से कैंसर और टीबी आदि जैसी गंभीरबीमारियां का सामना करना पडता है। एक तरह से बाल श्रमिक का जीवन जीते जी नरक बन जाता है।
आज बाल मजदूरी समाज पर कलंक है। इसके खात्मे के लिए सरकारों और समाज को मिलकर काम करना होगा। साथ ही साथ बाल मजदूरी पर पूर्णतया रोक लगनी चाहिए। बच्चों के उत्थान और उनकेअधिकारों के लिए अनेक योजनाओं का प्रारंभ किया जाना चाहिए। जिससे बच्चों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव दिखे। और शिक्षा का अधिकार भी सभी बच्चों के लिए अनिवार्य कर दिया जाना चाहिए।गरीबी दूर करने वाले सभी व्यवहारिक उपाय उपयोग में लाए जाने चाहिए। बालश्रम की समस्या का समाधान तभी होगा जब हर बच्चे के पास उसका अधिकार पहुँच जाएगा। इसके लिए जो बच्चे अपनेअधिकारों से वंचित हैंउनके अधिकार उनको दिलाने के लिये समाज और देश को सामूहिक प्रयास करने होंगे। आज देश के प्रत्येक नागरिक को बाल मजदूरी का उन्मूलन करने की जरुरत है। और देष केकिसी भी हिस्से में कोई भी बच्चा बाल श्रमिक दिखेतो देष के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह बाल मजदूरी का विरोध करे। और इस दिशा में उचित कार्यवाही करें साथ ही साथ उनके अधिकार दिलानेके प्रयास करें। क्योंकि बच्चे ही भारत के भविष्य हैं। क्योंकि जब तक बच्चों को उनके अधिकारों और शिक्षा से वंचित रखा जायेगा। तब तक देश के उज्जवल भविष्य की कल्पना करना निरर्थक है। चाचानेहरू के सपनों का भारत तभी बन सकता है जब भारत के प्रत्येक बच्चे तक शिक्षा की ज्योति पहुंचे। जब तक भारत देश और पूरे विश्व से बाल मजदूरी खत्म नहीं होती तब तक बाल दिवस मनाना सार्थकनहीं होगा।
लेखक
ब्रह्मानंद राजपूतदहतोराशास्त्रीपुरमसिकंदराआगरा 
(Brahmanand Rajput) Dehtora, Agra
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