Tuesday, January 6, 2015

वोटों की बाढ़ से बदलाव की ओर बढ़ता कश्मीर


नितिन मिश्र 
क्रांतिकारी परिवर्तन के इस साल में कश्मीर घाटी में आयी भयानक बाढ़ ने लोगों के जन-मानस में लोकतंत्र के प्रति चाहत के लिए वोटों की बाढ़ का काम किया है I प्राकृतिक आपदा के सामने पूरी तरह विफल हुई कश्मीर की मौजूदा सरकार के लिए यह वास्तव में एक चुनौती भरा संदेश है I कँपकपाती सर्दी में भी शुरुवाती चरणों में केवल 8 घंटे में 71 प्रतिशत से अधिक वोटिंग एक बड़े बदलाव की ओर ही संकेत करता है I जहाँ हाल ही में अप्रैल-मई में हुए लोकसभा चुनाव में कश्मीर की जनता ने 52.6 प्रतिशत वोट करके भारत सरकार के गठन में अपनी भूमिका अदा की थी, वही केवल 6 महीनों में विकास बिजली और रोजगार की उम्मीद लगाये राज्य सरकार के महत्वपूर्ण गठन में लग गयी  है I
अभी कुछ दिनों पहले आयी स्टेट ऑफ वर्ल्ड पॉपुलेशन 2014 की रिपोर्ट के अनुसार अब हम एक ऐसी दुनियाँ में प्रवेश कर रहे हैं जब दुनियाँ में सबसे अधिक युवा होंगे I विश्व इतिहास में पहली बार आ रही इस स्थिति में विश्व में सबसे अधिक युवा आबादी की तादाद रखने वाले हमारे देश के लिए एक मजबूत लोकतान्त्रिक व्यवस्था, कानून के शासन और विकास के लिए समर्पित सरकार के दम पर विश्व इतिहास में अपनी उपस्थिति दर्ज करनी ही होगी I स्टेट ऑफ वर्ल्ड पॉपुलेशन की रिपोर्ट पर गहराई से विचार करें तो भारतीय युवाओं का एक मजबूत लोकतन्त्र के प्रति बढ़ता हुआ विश्वास वास्तव में इस रिपोर्ट को पहले ही स्पष्ट प्रकट कर चुका है कि हम एक नई दुनियाँ में प्रवेश कर रहे  हैं I कश्मीर के चुनाव के शुरुवाती चरणों में जिस तरह से वहाँ की जनता ने शांतिपूर्ण तरीके से अपने राज्य को विकास प्रदान करने की उम्मीद लिए जो वोटों की बाढ़ का आगाज किया है, वह सही मायनों में इस नयी युवा दुनियाँ के लिए अनुकरणीय है I आज विश्व में सबसे अधिक युवा जनसंख्या वाला देश होने के नाते इस नई दुनियाँ के प्रति हमारा उत्तरदायित्व भी अन्य देशों की अपेक्षा सबसे अधिक हो जाता है I मजबूत लोकतन्त्र के प्रति बढ़ती हुई कश्मीर की इस बाढ़ ने युवाओं के साथ-साथ बुजुर्गों और महिलाओं के जोश को भी बढ़ाने का कार्य किया है I
आने वाले कल को बेहतर बनाने के लिए आज कश्मीर की लड़कियाँ भी उत्साह के साथ अपने सुनहरे भविष्य के सपने मन में लिये हुए चुनावों में पूरे मन से हिस्सा ले रहीं हैं I  उनका कहना है कि दहशतगर्दों को सबक सिखाने का यही मौका है I ऊँची तालीम की तमन्ना लिए आज वो फिर से उसी भारत की तरफ देख रहीं हैं जहाँ कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स जैसी महिलाओं ने पुरुषों के वर्चस्व को तोड़कर भारतीय इतिहास में अपनी उपस्थिति हमेशा के लिये दर्ज करा दी I कट्टरपंथी विचारधारा को करारा तमाचा देते हुए कश्मीर के बुजुर्गों ने भी अपने बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए भारतीय लोकतन्त्र के प्रति बढ़ते हुए उत्साह को जिस तरह से मताधिकार का प्रयोग करके प्रकट किया है, वह वास्तव में हमेशा से लोकतन्त्र के विरोधी रहे हमारे पडौसी मुल्कों के लिए एक बढ़ा सबक है I एक नूतन सरकार के अभिनंदन के लिए एक माह से मनाया जा रहा यह महापर्व आज दुनियाँ के सबसे बड़े लोकतन्त्र में अपनी जड़ों को गहराई तक जमा चुका है I
2001 और 2011 के जनगणना आँकड़ों पर बारीखी से नजर डालें तो हम देखेंगे कि यह राज्य हमेशा से युवाओं को रोजगार और जनता को विकास देने से सर्वथा दूर रहा है I अगर राज्य सरकार के सरकारी आँकड़ों पर भी विश्वास करें तो पता चलता है कि 125 लाख की कुल आबादी वाले इस राज्य में 6 लाख युवा बेरोजगार हैं जबकि वास्तविक आँकड़ों में 15 लाख से अधिक कश्मीरी युवाओं के पास रोजगार नहीं है I करीब 2.5 लाख शिक्षित युवाओं के पास रोजगार का कोई भी साधन नहीं है जिनमें 42 हजार स्नातक और 11 हजार परास्नातक बेरोजगार भी शामिल हैं I आज इस नवीन युवा दुनियाँ में युवाओं का प्रतिनिधित्व कर रहे इस देश के लिए शिक्षित बेरोजगार युवाओं की बदहाली के यह आँकड़े एक शर्मिन्दगी के सबक के सिवाय और कुछ हो ही नहीं सकते I   भारतीय प्रायद्वीप का सिरमौर कहा जाने वाला यह राज्य, सभी राज्यों से अधिक      5 प्रतिशत बेरोजगारी दर के साथ अब तक भारत का सिरमौर ही बना हुआ है I चौंकाने वाले आँकड़ों में जहाँ देश में महिला बेरोजगारी 3.7 प्रतिशत है वहीं यह राज्य 16.3 प्रतिशत कि बढ़त बनाये हुए 20 प्रतिशत महिला बेरोजगारी के साथ अभी तक की सभी 15 राज्य सरकारों के जनता को विकास और युवाओं को रोजगार देने के खोखले दावों की हवा निकाल चुका है I     
2008 में हुई 61 प्रतिशत वोटिंग के बाद आये इस षष्ठवर्षीय उत्सव में कश्मीर की जनता ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया है I 68 सालों से लगातार लड़ाइयों और आतंकवाद का दंश झेल रहे कश्मीरवासियों के लिए 6 वर्ष के बाद आने वाले इस उत्सव को उत्साह के साथ ही मनाना चाहिए क्योंकि यही एक दिन उनके अगले 6 वर्षों के समाज और सरकार का निर्धारण करता है I आज कश्मीरवासी इस बात को अच्छी तरह समझ चुके हैं कि जब समस्त दुनियाँ भारत को एक मजबूत आर्थिक और लोकतान्त्रिक शक्ति के तौर पर देख रही है तब भारतीय लोकतन्त्र के प्रति उनका योगदान भी आवश्यक हो जाता है I अलगाववाद की जिस आग को लगाकर हमारे पडौसी मुल्क जिस तरह से 68 सालों से कश्मीर में अनुच्छेद 370 का सहारा लेकर लोगों को भ्रमित करने में लगे हुए हैं उसको 11 प्रतिशत की मतदान बढ़त के साथ हमारी जनता ने सिरे से ही नकार दिया है I
जून 1947 में महाराज हरि सिंह का अपने निजी स्वार्थ के लिए पेटदर्द का बहाना बनाकर भारतीय संघ में शामिल न होने के साथ कश्मीर को एक अलग स्वतंत्र राज्य रखना, आज तक कश्मीरवासियों की स्वतन्त्रता के लिए अभिशाप ही रहा है और महाराज हरि सिंह का वह पेटदर्द भारत सरकार के लिए सरदर्द बना हुआ है I लेकिन वोटों की बाढ़ से बदलाव की ओर बढ़ रही यह सुंदर घाटी, एक नवीन लोकतान्त्रिक सरकार के गठन को साथ लिए, आज इस नयी युवा दुनियाँ के सबसे बड़े लोकतन्त्र के सरदर्द को दूर करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाती हुई अपने धरती के स्वर्ग के गौरव को पुनः प्राप्त करने के लिए निकल चुकी है I
    
नितिन मिश्र
प्रवक्ता भौतिक विज्ञान
(09412812535, 07037609123)

nitinmishra97@gmail.com     

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